Indian Air Force

9,500 फीट पर वायुसेना का करिश्मा! मणिपुर की आग पर Mi-17V5 ने 40,000 लीटर पानी बरसाया

भारतीय वायुसेना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि मुश्किल वक्त में देश की सुरक्षा और राहत कार्य में वो हमेशा सबसे आगे खड़ी रहती है. मणिपुर और नागालैंड की सीमा पर स्थित

By: Defence Pulse Desk

Published on: February 2, 2026. 7:48 am

भारतीय वायुसेना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि मुश्किल वक्त में देश की सुरक्षा और राहत कार्य में वो हमेशा सबसे आगे खड़ी रहती है. मणिपुर और नागालैंड की सीमा पर स्थित प्रसिद्ध द्ज़ुको वैली (Dzukou Valley) में जब जंगल की भीषण आग ने तबाही मचानी शुरू की, तो वायुसेना के जांबाज पायलटों ने अपनी जान जोखिम में डालकर एक ऐसा राहत अभियान चलाया जो इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया.

करीब 9,500 फीट की खतरनाक ऊंचाई पर स्थित इस दुर्गम इलाके में Mi-17V5 हेलिकॉप्टरों ने लगातार तीन दिनों तक अथक मेहनत की और लगभग 40,000 लीटर पानी आसमान से बरसाकर जंगल की आग पर काबू पाने में अहम भूमिका निभाई. यह अभियान सिर्फ एक ऑपरेशन नहीं, बल्कि वायुसेना के साहस, तकनीक और समर्पण की एक मिसाल है.

चुनौतियों से भरा था यह मिशन

इस राहत अभियान को अंजाम देना कोई आसान काम नहीं था. वायुसेना के पायलटों को तेज हवाओं, बेहद कम दृश्यता और अत्यधिक ऊंचाई पर उड़ान जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ा. सबसे बड़ी दिक्कत यह थी कि 9,500 फीट की ऊंचाई पर हवा काफी पतली हो जाती है, जिसके कारण हेलीकॉप्टर की उठाने की क्षमता (लिफ्ट) करीब 25 से 30 प्रतिशत तक घट जाती है.

इसका मतलब यह है कि सामान्य परिस्थितियों की तुलना में हेलीकॉप्टर कम वजन उठा पाता है और पायलटों को बेहद सावधानी से उड़ान भरनी पड़ती है. ऐसे हालात में जरा सी चूक भी बड़ा हादसा बन सकती थी, लेकिन भारतीय वायुसेना के प्रशिक्षित और अनुभवी पायलटों ने अपनी कुशलता से यह मिशन सफलतापूर्वक पूरा किया.

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बैंबी बकेट तकनीक ने खेला अहम रोल

इस पूरे ऑपरेशन में Mi-17V5 हेलिकॉप्टरों में लगे बैंबी बकेट (Bambi Bucket) ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. यह एक खास तरह का बकेट होता है जो हेलीकॉप्टर के नीचे लटकाया जाता है और पानी को स्टोर करके आग प्रभावित इलाकों पर सटीक तरीके से गिराया जा सकता है. एक बैंबी बकेट में करीब 3,500 लीटर तक पानी ले जाने की क्षमता होती है.

इस तकनीक की मदद से वायुसेना के हेलीकॉप्टरों ने आग के फैलाव वाले इलाकों पर लगातार पानी की बौछारें की, जिससे आग को तेजी से फैलने से रोका जा सका. यह पूरा सिस्टम बेहद कुशलता से डिज़ाइन किया गया है और ऐसे राहत कार्यों में अत्यंत प्रभावी साबित होता है.

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‘जहां हवा विरल, वहां संकल्प दृढ़’

भारतीय वायुसेना ने इस सफल अभियान के बाद सोशल मीडिया पर एक प्रेरणादायक पोस्ट साझा की, जिसमें कहा गया – “जहां हवा विरल होती है, वहां संकल्प दृढ़ रहता है. मणिपुर के ऊपर 9,500 फीट की ऊंचाई पर, भारतीय वायु सेना के Mi-17 V5 विमानों ने भीषण आग, तेज हवाओं और कम दृश्यता का सामना करते हुए लगातार तीन दिनों तक 40,000 लीटर पानी पहुंचाया. संकट में सतर्क, कर्तव्य में अडिग.”

यह बयान न सिर्फ वायुसेना के समर्पण को दर्शाता है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि भारतीय सेनाएं हर परिस्थिति में देश और नागरिकों की सुरक्षा के लिए तैयार रहती हैं.

पूर्वोत्तर में जारी है राहत मिशन

मणिपुर का यह अभियान पूर्वोत्तर भारत में चल रहे हवाई अग्निशमन अभियानों की एक महत्वपूर्ण कड़ी है. इससे पहले अरुणाचल प्रदेश में भी वायुसेना ने जंगल की आग को काबू करने के लिए 12,000 लीटर पानी गिराया था. सूखे मौसम के कारण इन राज्यों में हर साल मौसमी जंगल की आग का खतरा बढ़ जाता है, और ऐसे में वायुसेना की त्वरित कार्रवाई बेहद अहम हो जाती है.

इन अभियानों से न सिर्फ पर्यावरण को होने वाले नुकसान को कम किया जा रहा है, बल्कि स्थानीय लोगों की जान-माल की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो रही है. भारतीय वायुसेना का यह समर्पण दर्शाता है कि देश की रक्षा केवल सीमाओं पर ही नहीं, बल्कि आपदा के हर मोर्चे पर वो डटी रहती है.

Defence Pulse Desk

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