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रहस्यमयी Stealth UCAV की झलक से अटकलें तेज क्या भारत शॉर्ट-रेंज स्ट्राइक ड्रोन तैयार कर चुका है?

Stealth UCAV: आज की Modern warfare में ड्रोन सबसे बड़ा गेम-चेंजर बन चुके हैं। पहले जहां लड़ाई सिर्फ फाइटर जेट और टैंकों से लड़ी जाती थी, वहीं अब Unmanned systems यानी बिना पायलट वाले

By: Puja Defence Journalist

Published on: February 23, 2026. 12:08 pm

Stealth UCAV: आज की Modern warfare में ड्रोन सबसे बड़ा गेम-चेंजर बन चुके हैं। पहले जहां लड़ाई सिर्फ फाइटर जेट और टैंकों से लड़ी जाती थी, वहीं अब Unmanned systems यानी बिना पायलट वाले विमान अहम भूमिका निभा रहे हैं। हाल ही में एक रहस्यमयी Stealth UCAV की झलक सामने आने के बाद भारत को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है।

लोगों के मन में सवाल उठ रहा है क्या भारत ने भी चुपचाप एक ऐसा शॉर्ट-रेंज स्ट्राइक ड्रोन तैयार कर लिया है जो दुश्मन के रडार से बचकर हमला कर सके? भारत पिछले कुछ सालों से लगातार अपनी रक्षा तकनीक को मजबूत कर रहा है। ‘आत्मनिर्भर भारत’ के तहत रक्षा उपकरणों का स्वदेशी निर्माण बढ़ा है। ऐसे में स्टील्थ ड्रोन का विकास होना कोई हैरानी की बात नहीं है। अगर यह सच है, तो यह भारत की सैन्य शक्ति में बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।

Stealth UCAV क्या होता है? आसान भाषा में समझें

Stealth UCAV का पूरा नाम है Unmanned Combat Aerial Vehicle। मतलब ऐसा ड्रोन जो बिना पायलट के उड़ता है और लड़ाई के लिए इस्तेमाल होता है। स्टील्थ शब्द का मतलब है छिपकर काम करना। यानी यह ड्रोन दुश्मन के रडार पर आसानी से दिखाई नहीं देता। इसका डिजाइन खास तरह से बनाया जाता है ताकि इसकी रडार सिग्नेचर बहुत कम हो। ये ड्रोन सिर्फ निगरानी के लिए नहीं, बल्कि मिसाइल और बम ले जाने में भी सक्षम होते हैं।

कई बार ये दुश्मन के इलाके में गहराई तक जाकर हमला कर सकते हैं। आज अमेरिका, चीन और रूस जैसे देश इस तकनीक में काफी आगे हैं। लेकिन अब भारत भी इसी दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है। सीधी भाषा में कहें तो यह एक “चुपचाप हमला करने वाला स्मार्ट विमान” है, जिसे कंट्रोल रूम से ऑपरेट किया जाता है।

भारत का UCAV प्रोग्राम और रक्षा रणनीति

भारत ने पिछले कुछ सालों में ड्रोन टेक्नोलॉजी पर काफी निवेश किया है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी DRDO लगातार नए प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है। भारत का लक्ष्य साफ है विदेशी हथियारों पर निर्भरता कम करना और स्वदेशी तकनीक को मजबूत बनाना। इसी दिशा में कई UCAV और अटैक ड्रोन प्रोजेक्ट चल रहे हैं। 

रिपोर्ट्स के अनुसार भारत घातक नाम के Stealth UCAV पर काम कर रहा है। इसके अलावा HAL का CATS Warrior प्रोजेक्ट भी चर्चा में है। सरकार ने हाल ही में बड़े रक्षा सौदों को मंजूरी दी है, जिससे साफ है कि देश अपनी एयर स्ट्राइक क्षमता बढ़ाने के लिए गंभीर है। सीमा पर चीन और पाकिस्तान के साथ तनाव को देखते हुए, भारत ऐसी तकनीक विकसित करना चाहता है जो तेज, सटीक और सुरक्षित हमला कर सके।

क्या भारत शॉर्ट-रेंज स्ट्राइक ड्रोन बना चुका है?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है क्या भारत ने वाकई शॉर्ट-रेंज स्टील्थ स्ट्राइक ड्रोन तैयार कर लिया है? अभी तक सरकार ने आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन कई संकेत इस दिशा में इशारा करते हैं। भारत ने हाल ही में Nagastra जैसे लूटरिंग म्यूनिशन ड्रोन विकसित किए हैं जो दुश्मन के टारगेट पर सटीक हमला कर सकते हैं।

इसके अलावा UAV-launched मिसाइल का सफल परीक्षण भी किया गया है। इसका मतलब है कि भारत ड्रोन से मिसाइल लॉन्च करने की क्षमता हासिल कर चुका है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में बाज़ नाम के अटैक ड्रोन की भी चर्चा है, जो सेना के लिए तैयार किया जा रहा है। इन सबको जोड़कर देखें तो लगता है कि भारत शॉर्ट-रेंज स्ट्राइक ड्रोन टेक्नोलॉजी में काफी आगे बढ़ चुका है।

Ghataak UCAV भारत का गुप्त हथियार?

घातक भारत का सबसे महत्वाकांक्षी UCAV प्रोजेक्ट माना जा रहा है। इसे DRDO द्वारा विकसित किया जा रहा है। इसका डिजाइन फ्लाइंग-विंग मॉडल पर आधारित है, जिससे यह रडार पर कम दिखाई देता है। इसमें इंटरनल वेपन बे होगा ताकि हथियार बाहर से दिखाई न दें। रिपोर्ट्स के अनुसार यह 1000 किलोमीटर तक की रेंज में ऑपरेट कर सकता है।

अगर यह सफल होता है तो भारत के लिए यह बहुत बड़ी उपलब्धि होगी। घातक का मकसद दुश्मन के इलाके में बिना पकड़े गए गहराई तक जाकर हमला करना है। हालांकि अभी इसका पूरा ऑपरेशनल डिटेल सार्वजनिक नहीं है, लेकिन यह साफ है कि भारत stealth combat drone बनाने की दिशा में गंभीरता से काम कर रहा है।

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निजी कंपनियों और स्टार्टअप की भूमिका

आज भारत में कई डिफेंस स्टार्टअप ड्रोन टेक्नोलॉजी पर काम कर रहे हैं। Bengaluru, Hyderabad और Pune जैसे शहर ड्रोन इनोवेशन के हब बन चुके हैं। AI आधारित ड्रोन, स्वार्म ड्रोन और अटैक ड्रोन पर काम हो रहा है। Kaala Bhairav जैसे AI ड्रोन की चर्चा भी मीडिया में रही है।

सरकार iDEX और Make in India जैसी योजनाओं के तहत स्टार्टअप्स को सपोर्ट कर रही है। इससे साफ है कि सिर्फ सरकारी संस्थान ही नहीं, बल्कि निजी कंपनियां भी मिलकर भारत की ड्रोन ताकत बढ़ा रही हैं। यह मॉडल अमेरिका और इज़राइल जैसे देशों की तरह है, जहां प्राइवेट सेक्टर डिफेंस टेक्नोलॉजी में बड़ा रोल निभाता है।

स्टील्थ स्ट्राइक ड्रोन के फायदे

  • स्टील्थ शॉर्ट-रेंज स्ट्राइक ड्रोन के कई फायदे हैं।
  • पहला यह बिना पायलट के होता है, इसलिए सैनिकों की जान का खतरा कम होता है।
  • दूसरा यह दुश्मन के रडार से बच सकता है, जिससे अचानक हमला करना आसान हो जाता है।
  • तीसरा यह सटीक निशाना लगाता है, जिससे कम नुकसान में बड़ा असर होता है।
  • इसके अलावा ये ड्रोन जल्दी तैनात किए जा सकते हैं और सीमावर्ती क्षेत्रों में लगातार निगरानी भी कर सकते हैं।
  • आज के समय में यह तकनीक युद्ध का भविष्य मानी जा रही है।

वैश्विक स्तर पर भारत की स्थिति

अमेरिका, चीन और रूस इस क्षेत्र में काफी आगे हैं। चीन का GJ-11 और अमेरिका का X-47B जैसे ड्रोन पहले ही चर्चा में रहे हैं। लेकिन भारत भी अब इस दौड़ में पीछे नहीं है। भारतीय वायुसेना लगातार अपने फ्लीट को आधुनिक बना रही है। रक्षा बजट में बढ़ोतरी और स्वदेशी निर्माण पर जोर यह दिखाता है कि भारत आने वाले समय में UCAV टेक्नोलॉजी में मजबूत खिलाड़ी बन सकता है। अगर घातक और अन्य प्रोजेक्ट सफल होते हैं, तो भारत एशिया में एक बड़ी ड्रोन शक्ति बन सकता है।

निष्कर्ष

सीधे शब्दों में कहें तो भारत ने आधिकारिक रूप से किसी स्टील्थ शॉर्ट-रेंज Stealth UCAV की घोषणा नहीं की है। लेकिन जो संकेत मिल रहे हैं वे बताते हैं कि भारत तेजी से इस लक्ष्य के करीब पहुंच चुका है। घातक प्रोजेक्ट, अटैक ड्रोन टेस्टिंग और AI आधारित सिस्टम इस बात का प्रमाण हैं कि भारत भविष्य की युद्ध रणनीति को ध्यान में रखकर तैयारी कर रहा है। आने वाले कुछ वर्षों में संभव है कि भारत अपना स्वदेशी स्टील्थ कॉम्बैट ड्रोन दुनिया के सामने पेश करे। अगर ऐसा होता है, तो यह भारत की सैन्य ताकत में ऐतिहासिक बदलाव साबित होगा।

Puja Defence Journalist

Puja is a Defence Journalist and Editor at DefencePulse.org. She covers Indian defence, national security, military developments, and strategic affairs, focusing on accurate reporting and easy-to-understand analysis for readers.

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