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AMCA में 3D Thrust Vectoring पर सवाल, P-8I से Missile Attack और Tejas Mk1A का DRDO सिस्टम

क्या एक Fifth Generation Stealth Fighter को Close Range Dogfight में दुश्मन के विमान को Outmaneuver करने के लिए Extreme Agility और 3D Thrust Vectoring Nozzle की जरूरत होती है, या फिर Modern Air

By: Defence Pulse Desk ✪

Published on: October 26, 2026. 9:23 pm

क्या एक Fifth Generation Stealth Fighter को Close Range Dogfight में दुश्मन के विमान को Outmaneuver करने के लिए Extreme Agility और 3D Thrust Vectoring Nozzle की जरूरत होती है, या फिर Modern Air Defence Envelope के बाहर से P 8I जैसे Heavy Platform से Hypersonic Quasi Ballistic Missile Fire करना दुश्मन के पूरे Fleet को तबाह करने के लिए काफी है?

Modern Battlefield में जब Western Border से लेकर Srinagar और Eastern Front तक Fighter Squadrons की Massive Shifting हो रही हो, तब Northern Command के लिए AI Swarm Drones और Frontline पर दुश्मन के Radar Emissions को Trace करने वाले Man Portable Electronic Intelligence Modules पूरे Tactical Domain को Redefine करने वाले हैं। इस Article में हम भारतीय रक्षा क्षेत्र से जुड़े ऐसे ही महत्वपूर्ण Updates के बारे में जानेंगे।

1. भारतीय सेना खरीदेगी Counter Drone Systems और AI Swarm Drones

DRDO का Man-Portable Electronic Intelligence System
DRDO का Man-Portable Electronic Intelligence System

भारतीय सेना की Northern Command के लिए Drone Warfare और Counter Drone Capability को मजबूत करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण Procurement Tender जारी किया गया है।

Modern Battlefield में एक छोटा सा Drone भी दुश्मन की Position की Reconnaissance कर सकता है, Artillery को Target Coordinates दे सकता है और Military Installations के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। ऐसे में दुश्मन के Drones को Detect और Neutralize करने के साथ साथ अपने Drones को Coordinated तरीके से Missions में Deploy करना भी जरूरी है।

इसी दिशा में जारी Tender के मुताबिक, लगभग 16.92 करोड़ रुपये की इस Deal में करीब 90 Counter UAS Systems, चार Sets Swarm Drone Systems और 274 Datalinking Systems खरीदने की योजना है। इसका उद्देश्य Hostile Drones के खिलाफ Protection को मजबूत करना और अपने Drone Operations को Support करना है।

Counter UAS Systems का इस्तेमाल दुश्मन के Drones को Detect और Neutralize करने के लिए किया जाएगा। Battlefield में छोटे Drones की संख्या बढ़ने के साथ उन्हें समय पर Identify करना और उनके खिलाफ प्रभावी Response देना जरूरी हो जाता है।

दूसरा महत्वपूर्ण हिस्सा AI Enabled Swarm Drone Systems हैं। इनका उद्देश्य कई Drones को Coordinated तरीके से Operate करना है, ताकि वे Reconnaissance और दूसरे Tactical Missions में अपनी भूमिका निभा सकें। हालांकि, Tender की Summary में इन Drones की Exact Range, Payload और Autonomy Level की जानकारी नहीं दी गई है।

तीसरा हिस्सा 274 Datalinking Systems का है। ये Unmanned Aircraft और Ground Control Elements के बीच Command, Telemetry और दूसरे जरूरी Data को Transfer करने में मदद करेंगे। Reliable Communication के बिना किसी भी Drone Network और उसके Operations को प्रभावी तरीके से Coordinate करना मुश्किल होता है।

इस Tender के लिए Bid Submission की Deadline 28 नवंबर 2026 रखी गई है, जबकि Pre Bid Meeting 31 अक्टूबर को अखनूर में आयोजित करने की योजना है।

2. P 8I Aircraft से Long Range Anti Ship Missile Attack की संभावना

P-8I Aircraft से Long-Range Anti-Ship Missile Attack
P-8I Aircraft से Long-Range Anti-Ship Missile Attack

भारतीय नौसेना की Maritime Strike Capability को बढ़ाने के लिए P 8I Poseidon Aircraft की भूमिका को विस्तार देने की संभावना सामने आई है।

Indian Ocean Region में दुश्मन के Warships या Submarines की मौजूदगी का पता लगाना महत्वपूर्ण है, लेकिन बिना अपने Frontline Warships को खतरे वाले क्षेत्र में भेजे दूर से उन लक्ष्यों पर हमला करने की क्षमता हासिल करना भी बड़ा फायदा दे सकता है।

फरवरी 2026 में Defence Acquisition Council ने छह अतिरिक्त P 8I Aircraft खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। अगर यह Acquisition Final होता है, तो भारतीय नौसेना के P 8I Fleet की संख्या 12 से बढ़कर 18 हो सकती है। इन विमानों का इस्तेमाल Arabian Sea, Bay of Bengal और Andaman and Nicobar Islands के आसपास Surveillance को बेहतर बनाने के लिए किया जाएगा।

P 8I Aircraft की Anti Ship Capability के लिए फिलहाल Harpoon Missile का इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, हालिया Reports के मुताबिक, भविष्य में इन विमानों को लंबी दूरी तक मार करने वाले Weapons से Integrate करने के विकल्पों का मूल्यांकन किया जा रहा है।

इसमें पहला विकल्प DRDO की Indigenous NSM MR Anti Ship Missile है, जिसकी Range लगभग 350 किलोमीटर बताई गई है। अगर भविष्य में इसका P 8I Aircraft के साथ Integration संभव होता है, तो भारतीय नौसेना को स्वदेशी Missile की मदद से दूर से ही दुश्मन के Warships को Target करने का विकल्प मिल सकता है।

दूसरे विकल्प के तौर पर Israeli Origin Air LORA Missile का मूल्यांकन किया जा रहा है। यह LORA Missile का Air Launched Variant है। हालांकि, P 8I पर इसके Integration की अभी पूरी तरह पुष्टि नहीं हुई है।

इस Integration में एक महत्वपूर्ण पहलू अमेरिकी अनुमति का भी है। P 8I अमेरिकी मूल का Aircraft है और इसमें किसी बाहरी Weapon System को Integrate करने के लिए संबंधित अनुमतियों की आवश्यकता पड़ सकती है। Air LORA एक Israeli Origin Missile है, जबकि NSM MR भारत का Indigenous System है। दोनों विकल्पों के Integration की संभावना पर विचार किया जा रहा है, लेकिन इसे अंतिम मंजूरी मिलना अभी सुनिश्चित नहीं है।

इसके अलावा, भारत C295 Aircraft पर आधारित एक Maritime Aircraft को भी नौसेना में शामिल करने पर विचार कर रहा है। यह Aircraft Routine Surveillance और Coastal Missions में सहायता कर सकता है। इससे P 8I Fleet को Deep Surveillance और High End Missions के लिए Reserve रखने में मदद मिल सकती है और उसके Operational Life को भी बेहतर तरीके से Manage किया जा सकता है।

3. Tejas Mk1A की Western, Northern और Eastern Sectors में Deployment की योजना

Tejas Mk1A की Western, Northern और Eastern Sectors में Deployment
Tejas Mk1A की Western, Northern और Eastern Sectors में Deployment

MiG 21 के Retirement के बाद Western Sector में Fighter Squadron Strength बनाए रखना भारतीय वायु सेना के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। ऐसे में Tejas Mk1A की Deployment Strategy महत्वपूर्ण हो जाती है।

Reports के मुताबिक, Tejas Mk1A के पहले दो Squadrons को Western Sector में Deploy करने की योजना बनाई गई है। इन्हें राजस्थान और गुजरात के Forward Airbases पर तैनात किया जा सकता है, जहां इनकी भूमिका Pakistan Facing Air Defence Operations को Support करने की होगी।

इन विमानों से Retired MiG 21 Fighter Jets की जगह लेने और Quick Reaction Point Defence Operations में सहायता करने की उम्मीद है।

हालांकि, Tejas Mk1A की Deployment केवल Pakistan Border तक सीमित रखने की योजना नहीं है। Reports के मुताबिक, तीसरे Squadron को 2027 के अंत तक तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए Srinagar Airbase को एक संभावित Location के रूप में देखा जा रहा है।

इसके बाद Eastern Sector में भी Tejas Mk1A की तैनाती की योजना है। Reports के अनुसार, चौथे और पांचवें Squadrons को 2028 के दौरान तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। इन्हें Hasimara, Bagdogra, Tezpur और Chabua Airbases में से किसी एक या अधिक स्थानों पर Deploy किया जा सकता है। हालांकि, इनके Final Basing Locations अभी पूरी तरह तय नहीं हुए हैं।

कुल मिलाकर, Tejas Mk1A की Deployment Strategy Western Sector से शुरू होकर Northern और Northeastern Front तक विस्तार कर सकती है। लेकिन इसकी वास्तविक Timeline Aircraft Deliveries और Operational Clearances पर निर्भर करेगी।

Engine Shortage के कारण Hindustan Aeronautics Limited (HAL) समय पर Tejas Aircraft की Delivery नहीं कर पा रहा है। इसलिए Squadron Formation और Deployment की योजनाओं पर Aircraft Deliveries का असर पड़ सकता है।

4. AMCA के लिए 3D Thrust Vectoring Nozzle पर काम की प्राथमिकता कम?

AMCA के लिए 3D Thrust Vectoring Nozzle
AMCA के लिए 3D Thrust Vectoring Nozzle

भारत के AMCA Stealth Fighter Jet के लिए 3D Thrust Vectoring Nozzle Technology को लेकर चर्चा जारी है। सवाल यह है कि क्या Fifth Generation Fighter Aircraft को दुश्मन के विमानों को Outmaneuver करने के लिए Extreme Agility की जरूरत है, या Stealth और Long Range Engagement पर ध्यान देना अधिक महत्वपूर्ण है।

DRDO की Gas Turbine Research Establishment (GTRE) ने पहले रूस के Klimov Design Bureau के साथ मिलकर AMCA के लिए 3D Thrust Vectoring Nozzle विकसित करने की योजना बनाई थी। बाद में इस Technology को भारत में ही विकसित करने की संभावना पर Studies पूरी करने की जानकारी सामने आई थी।

हालांकि, Latest Reports के मुताबिक, AMCA के लिए इसका Working Prototype विकसित करना फिलहाल मुख्य प्राथमिकता नहीं दिख रहा है। भारतीय वायु सेना की ओर से भी इसकी कोई Specific Requirement सामने नहीं आई है।

AMCA Mark I में इस Technology के इस्तेमाल की योजना नहीं है। इसमें GE F414 Series Engine इस्तेमाल किए जाने की योजना है, जबकि 3D Thrust Vectoring Nozzle को भविष्य में AMCA Mark II के लिए अधिक व्यावहारिक विकल्प माना जा रहा है। AMCA Mark II के 2035 से 2040 के बीच Service में आने की संभावना बताई जाती है और इसके लिए भारत में विकसित Indigenous Engine इस्तेमाल करने की योजना है।

3D Thrust Vectoring Nozzle कैसे काम करता है?

Traditional Engine Nozzle मुख्य रूप से Thrust को पीछे की ओर निर्देशित करता है। इसके विपरीत, Thrust Vectoring Nozzle Exhaust की Direction बदलकर Aircraft को अतिरिक्त Control प्रदान करता है।

3D Thrust Vectoring System में Thrust को कई दिशाओं में Redirect किया जा सकता है। इससे Aircraft की Maneuverability बेहतर हो सकती है। इस तरह की Technology Su 30MKI के साथ साथ रूसी मूल के Su 35 और Su 57 जैसे विमानों में भी देखने को मिलती है।

हालांकि, इस Technology के कुछ नुकसान भी हैं। Engine के सबसे गर्म हिस्से में लगाए जाने वाले इस Mechanism से Mechanical Complexity, Weight और Maintenance Requirements बढ़ सकती हैं। इसके अलावा, Thermal और Exhaust Signature को ठीक से Manage नहीं करने पर Stealth Aircraft के Infrared Signature पर भी असर पड़ सकता है।

इसीलिए AMCA जैसे Fifth Generation Fighter Jet में 3D Thrust Vectoring System को प्राथमिकता देने से पहले इसके फायदे और नुकसान पर विचार करना जरूरी है।

Stealth Fighter का मुख्य फायदा दुश्मन को पहले Detect करना और अपनी Stealth Capability का इस्तेमाल करके Beyond Visual Range (BVR) में Engagement करना है। इस तरह Close Range Dogfight से बचने की संभावना बढ़ सकती है।

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि Thrust Vectoring Technology पूरी तरह बंद कर दी गई है। भविष्य में भारतीय वायु सेना की ओर से इसकी Requirement सामने आने पर GTRE इसके Development पर काम कर सकती है।

इस Technology को विकसित करने के लिए भविष्य में भारत में बनने वाले Aero Engine की Design और Requirements को ध्यान में रखना होगा। जब तक Indigenous Engine की Design और Development आगे नहीं बढ़ती, तब तक उसके अनुरूप Nozzle विकसित करने की प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है।

5. DRDO का Man Portable Electronic Intelligence System

भारतीय रक्षा बलों के लिए Electronic Warfare Capability को मजबूत करने की दिशा में DRDO एक Man Portable Electronic Intelligence System विकसित करने पर काम कर रहा है।

Modern Battlefield में अगर दुश्मन अपना Radar सक्रिय करके किसी Aircraft या Incoming Threat की तलाश कर रहा है, तो उसके Signals को Detect और Analyse करके Radar System के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी हासिल की जा सकती है।

इसी Capability को Frontline Troops तक पहुंचाने के लिए DRDO की Defence Electronics Research Laboratory (DLRL) ने Man Portable Electronic Intelligence Module के Development, Integration और Qualification के लिए एक Tender जारी किया है।

इसका उद्देश्य एक ऐसा Compact System विकसित करना है, जिसे Military Personnel बड़े Vehicle Mounted या Fixed Intelligence Systems पर निर्भर हुए बिना Field में अपने साथ ले जा सकें।

Electronic Intelligence क्यों महत्वपूर्ण है?

Electronic Intelligence का मतलब Radar जैसे Electronic Systems से निकलने वाले Signals को Collect और Analyse करना है। जब कोई Radar Operate करता है, तो उसके Signals की Frequency और दूसरी Characteristics से Analysts को यह समझने में मदद मिल सकती है कि किस प्रकार का Radar सक्रिय है।

इस जानकारी से दुश्मन के Radar Systems की पहचान करने, उनके बारे में Situational Awareness बढ़ाने और Operational Decisions लेने में मदद मिल सकती है।

अगर दुश्मन के Radar Signals और उनकी Location का पता चल जाए, तो Artillery Units को Counter Battery Fire के लिए जानकारी दी जा सकती है। इसी तरह Loitering Munitions या Drones के जरिए भी संबंधित Targets को निशाना बनाने की योजना बनाई जा सकती है।

भारत के पास पहले से ऐसे Systems मौजूद हैं, जो दुश्मन के Radars की Location का पता लगा सकते हैं। हालांकि, इनमें से कुछ Systems बड़े होते हैं और Truck Mounted Platforms पर इस्तेमाल किए जाते हैं। इस वजह से उन्हें हर Location पर आसानी से Deploy करना संभव नहीं होता।

DRDO का प्रस्तावित Compact System इस Capability को अधिक Portable बनाने की दिशा में एक कदम है। इसे सैनिक अपने साथ ले जा सकेंगे, जिससे अलग अलग Field Locations पर Deployment आसान हो सकता है। खासकर छोटी Reconnaissance Units के लिए यह उपयोगी साबित हो सकता है।

हालांकि, इस System की वास्तविक Performance उसकी Detection Range, Frequency Coverage, Signal Processing Capability और Battery Endurance जैसे Factors पर निर्भर करेगी। इन क्षमताओं के बारे में विस्तृत जानकारी सामने आने के बाद ही इसके वास्तविक Operational Role का आकलन किया जा सकेगा।

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